इंदौर। लोकायुक्त
पुलिस ने सहकारिता विभाग के उपायुक्त कार्यालय में पदस्थ वरिष्ठ सहकारिता
निरीक्षक राकेशकुमार नाहर (जैन) को एक सहकारी संस्था के अध्यक्ष से 50 हजार
रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। आरोपी ने संस्था के ऑडिट के लिए
पांच लाख रुपए मांगे थे। उसे भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर मुचलके
पर रिहा कर दिया गया। उसके रिकार्ड की जांच कर कुछ दस्तावेज जब्त किए गए।
70 वर्षीय फरियादी सरदार हरिसिंह पिता तेजासिंह गांधी 1996-97 से एकता गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष हैं। बैराठी कॉलोनी में उनकी कोल्ं्रिडक की दुकान व वहीं संस्था का कार्यालय है। संस्था की तेजपुर गड़बड़ी में एक एकड़ से अधिक जमीन है, जो विकास प्राधिकरण में उलझी हुई है। प्राधिकरण ने अपनी योजना में शामिल करने के लिए यह जमीन अधिग्रहित की है। इसके खिलाफ संस्था ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसी को लेकर सवाल उठाते हुए निरीक्षक ने ऑडिट के बदले रिश्वत की मांग की थी।
फरियादी ने लोकायुक्त एसपी वीरेंद्रकुमार सिंह से शिकायत की। योजना के तहत बुधवार शाम 4.05 बजे आरोपी जैसे ही सरदार हरिसिंह की दुकान पर पहुंचा और 50 हजार रुपए लिए, वैसे ही लोकायुक्त दल ने उसे पकड़ लिया। आरोपी वर्ष 09 में शाजापुर से स्थानांतरित होकर आया था और उपायुक्त कार्यालय में शिकायत शाखा का प्रभारी भी था।
फोन आया, रिकार्ड जांचा, रिश्वत मांगी..
सरदार हरिसिंह ने लोकायुक्त अफसरों को अधिकृत बयान में कहा कि निरीक्षक नाहर का गत फरवरी में फोन आया था। 25 मार्च को वह कार्यालय पहुंचा और रौब जमाते हुए ऑडिट के लिए पांच लाख रुपए की मांग की। 26 मार्च को फिर आया और रिकार्ड की जांच की। कुछ निशान लगाए और बेलेंसशीट साथ ले गया किंतु दस्तखत नहीं किए। अध्यक्ष ने आरोपी से दस्तखत करने का कहा तो उसने कहा-इसके पांच लाख रुपए लगेंगे। अध्यक्ष को डराया कि जो जमीन मिली है वह महंगी है और ऑडिट नहीं होगा तो जमीन नहीं मिलेगी।
अध्यक्ष ने कहा कि नौ लाख रुपए में जमीन खरीदी है और पांच लाख रुपए रिश्वत मांग रहे हो। इस पर निरीक्षक ढाई लाख रुपए पर आ गया। फरियादी की बैराठी कॉलोनी स्थित दुकान पर बुधवार शाम चार बजे मुलाकात का समय तय हुआ, जिसमें पहली किश्त के रुप में एक लाख रुपए देना थे। सरदार हरिसिंह ने 50 हजार रुपए दिए तो निरीक्षक ऐतराज करने लगा। इस पर उसे बताया कि अभी इतने रुपए का ही इंतजाम हुआ है।
70 वर्षीय फरियादी सरदार हरिसिंह पिता तेजासिंह गांधी 1996-97 से एकता गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष हैं। बैराठी कॉलोनी में उनकी कोल्ं्रिडक की दुकान व वहीं संस्था का कार्यालय है। संस्था की तेजपुर गड़बड़ी में एक एकड़ से अधिक जमीन है, जो विकास प्राधिकरण में उलझी हुई है। प्राधिकरण ने अपनी योजना में शामिल करने के लिए यह जमीन अधिग्रहित की है। इसके खिलाफ संस्था ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसी को लेकर सवाल उठाते हुए निरीक्षक ने ऑडिट के बदले रिश्वत की मांग की थी।
फरियादी ने लोकायुक्त एसपी वीरेंद्रकुमार सिंह से शिकायत की। योजना के तहत बुधवार शाम 4.05 बजे आरोपी जैसे ही सरदार हरिसिंह की दुकान पर पहुंचा और 50 हजार रुपए लिए, वैसे ही लोकायुक्त दल ने उसे पकड़ लिया। आरोपी वर्ष 09 में शाजापुर से स्थानांतरित होकर आया था और उपायुक्त कार्यालय में शिकायत शाखा का प्रभारी भी था।
फोन आया, रिकार्ड जांचा, रिश्वत मांगी..
सरदार हरिसिंह ने लोकायुक्त अफसरों को अधिकृत बयान में कहा कि निरीक्षक नाहर का गत फरवरी में फोन आया था। 25 मार्च को वह कार्यालय पहुंचा और रौब जमाते हुए ऑडिट के लिए पांच लाख रुपए की मांग की। 26 मार्च को फिर आया और रिकार्ड की जांच की। कुछ निशान लगाए और बेलेंसशीट साथ ले गया किंतु दस्तखत नहीं किए। अध्यक्ष ने आरोपी से दस्तखत करने का कहा तो उसने कहा-इसके पांच लाख रुपए लगेंगे। अध्यक्ष को डराया कि जो जमीन मिली है वह महंगी है और ऑडिट नहीं होगा तो जमीन नहीं मिलेगी।
अध्यक्ष ने कहा कि नौ लाख रुपए में जमीन खरीदी है और पांच लाख रुपए रिश्वत मांग रहे हो। इस पर निरीक्षक ढाई लाख रुपए पर आ गया। फरियादी की बैराठी कॉलोनी स्थित दुकान पर बुधवार शाम चार बजे मुलाकात का समय तय हुआ, जिसमें पहली किश्त के रुप में एक लाख रुपए देना थे। सरदार हरिसिंह ने 50 हजार रुपए दिए तो निरीक्षक ऐतराज करने लगा। इस पर उसे बताया कि अभी इतने रुपए का ही इंतजाम हुआ है।
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