Monday, June 27, 2011
चीन में प्रकृति ने दिखाया बेहद रहस्यमयी रूप, लोगों में फैली दहशत
बीजिंग. चीन के एक शहर में ऐसी मरीचिका यानि धूल और आंधी से बनने वाली आकृति देखी गई जैसी पहले कभी नहीं देखी गई. लोगों ने इस रचना को "घोस्ट सिटी" का नाम दिया.
महीने के शुरुआत में भारी बारिस और आद्रता के कारण इस तरह की आकृतियाँ बनना आम बात है. लेकिन पूर्वी चाइना के हुशान शहर में बनने वाली यह आकृति अब तक देखी गई किसी भी आकृति से बेहद अलग और साफ़ थी. आसमान में अचानक ऐसा नजारा दिखा जैसे कोई भव्य महल आसमान में उड़ रहा हो.
इस रचना को देख पहले तो लोग चौक गए. कुछ ने कहा कि यह किसी समाप्त हो चुकी सभ्यता की तस्वीर है जिसे दिखा कर प्रकृति सन्देश देना चाहती है कि इस सभ्यता का अंत भी निकट है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में मिराज का बनाना कोई बड़ी बात नहीं लेकिन जितना साफ़ और विचित्र ढंग का मिराज यहाँ बना है ऐसा पहले कभी नहीं देख गया.
महीने के शुरुआत में भारी बारिस और आद्रता के कारण इस तरह की आकृतियाँ बनना आम बात है. लेकिन पूर्वी चाइना के हुशान शहर में बनने वाली यह आकृति अब तक देखी गई किसी भी आकृति से बेहद अलग और साफ़ थी. आसमान में अचानक ऐसा नजारा दिखा जैसे कोई भव्य महल आसमान में उड़ रहा हो.
इस रचना को देख पहले तो लोग चौक गए. कुछ ने कहा कि यह किसी समाप्त हो चुकी सभ्यता की तस्वीर है जिसे दिखा कर प्रकृति सन्देश देना चाहती है कि इस सभ्यता का अंत भी निकट है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में मिराज का बनाना कोई बड़ी बात नहीं लेकिन जितना साफ़ और विचित्र ढंग का मिराज यहाँ बना है ऐसा पहले कभी नहीं देख गया.
मौत से भी बचा सकती है हथेली में बनी यह रेखा
जीवन का अंतिम और अटल सत्य है मौत। जिसने भी जन्म लिया है उसे एक दिन मृत्यु अवश्य ही प्राप्त होगी। श्रीकृष्ण ने कहा है कि यह शरीर नश्वर है और केवल आत्मा ही अमर है। जिस प्रकार मनुष्य कपड़े बदलता है ठीक उसी प्रकार आत्मा शरीर बदलती है। मृत्यु के संबंध में हथेली में कई इशारे होते हैं। हस्त ज्योतिष के अनुसार जीवन और मृत्यु को जीवन रेखा प्रभावित करती है।
हथेली में अंगूठे के पास एक गोल घेरे जैसी रेखा होती है जो कि मणिबंध (हथेली के अंतिम भाग) तक जाती है। यही रेखा जीवन रेखा कहलाती है। यदि यह रेखा अस्पष्ट या कटी हुई या टूटी हुई हो तो व्यक्ति को जीवन भर कई प्रकार के कष्ट झेलने पड़ते हैं। कई बार ऐसी परिस्थितियों में मृत्यु का संकट भी सामने आ जाता है। कई लोगों के हाथों में जीवन रेखा के साथ ही एक ओर रेखा दिखाई देती है, यह अंदर की ओर होती है। इसे जीवन रेखा की सहायक रेखा माना जाता है। यह रेखा वर्गाकार तथा चौड़े हाथों में हो तो वह व्यक्ति बुद्धिमान और अच्छे स्वास्थ्य वाला होता है। इसके विपरित यदि किसी निर्बल तथा फीकी जीवन रेखा के साथ पाई जाने वाली यह रेखा कई कमियों को दूर करती है। यदि जीवन रेखा कहीं से कटी हुई हो या टूटी हुई हो और उस स्थान पर मंगल रेखा एकदम स्पष्ट हो तो वह व्यक्ति को मृत्यु से बचा लेती है। जीवन रेखा के टूटने या कटने का यही संकेत होता है कि उस आयु में व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति तक बन सकती है। यदि मंगल रेखा जीवन रेखा को काटती हुई चंद्र पर्वत जो कि अंगूठे के दूसरी ओर होता है तक जाती है तो व्यक्ति नशेबाज बन जाता है। साथ ही पूरी हथेली का गहराई परीक्षण किया जाना चाहिए तभी सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है।
हथेली में अंगूठे के पास एक गोल घेरे जैसी रेखा होती है जो कि मणिबंध (हथेली के अंतिम भाग) तक जाती है। यही रेखा जीवन रेखा कहलाती है। यदि यह रेखा अस्पष्ट या कटी हुई या टूटी हुई हो तो व्यक्ति को जीवन भर कई प्रकार के कष्ट झेलने पड़ते हैं। कई बार ऐसी परिस्थितियों में मृत्यु का संकट भी सामने आ जाता है। कई लोगों के हाथों में जीवन रेखा के साथ ही एक ओर रेखा दिखाई देती है, यह अंदर की ओर होती है। इसे जीवन रेखा की सहायक रेखा माना जाता है। यह रेखा वर्गाकार तथा चौड़े हाथों में हो तो वह व्यक्ति बुद्धिमान और अच्छे स्वास्थ्य वाला होता है। इसके विपरित यदि किसी निर्बल तथा फीकी जीवन रेखा के साथ पाई जाने वाली यह रेखा कई कमियों को दूर करती है। यदि जीवन रेखा कहीं से कटी हुई हो या टूटी हुई हो और उस स्थान पर मंगल रेखा एकदम स्पष्ट हो तो वह व्यक्ति को मृत्यु से बचा लेती है। जीवन रेखा के टूटने या कटने का यही संकेत होता है कि उस आयु में व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति तक बन सकती है। यदि मंगल रेखा जीवन रेखा को काटती हुई चंद्र पर्वत जो कि अंगूठे के दूसरी ओर होता है तक जाती है तो व्यक्ति नशेबाज बन जाता है। साथ ही पूरी हथेली का गहराई परीक्षण किया जाना चाहिए तभी सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है।
आईआईटी छात्र के लिए मुसीबत बन गया चैट करना
नई दिल्ली.अगर आप इंटरनेट पर चैट के आदी हैं, तो जरा सावधान हो जाएं। आईआईटी कानपुर के एक छात्र के लिए रात-रात भर चैट करना मुसीबत का कारण बन गया। छात्र ने दिल्ली हाईकोर्ट मे अर्जी दाखिल कर चैट करने वाली दोस्त (आईआईटी मुंबई में रिसर्च एसोसिएट) पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हुए उससे छुटकारा दिलाने की गुहार लगाई है।
वर्तमान में गुड़गांव की एक इंटरनेशनल फर्म में काम करने वाले युवक की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजीव कैत ने मुंबई से आरोपी युवती को सोमवार को अदालत मे निजी तौर पर पेश होने का आदेश दिया है।
साथ ही कोर्ट ने युवक को निर्देश दिया है कि वह युवती को मुंबई से दिल्ली आने व रहने का खर्च वहन करें। याचिका में छात्र ने कहा है कि उसकी पिछले साल अगस्त में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिक शास्त्र में पीएचडी करने वाली युवती से इंटरनेट के जरिए जान-पहचान हुई थी।
इसके बाद दोनों चैटिंग करने लगे। छात्र का आरोप है कि दोस्ती बढ़ने के साथ ही युवती उससे मिलने पिछले नवंबर में दिल्ली आ पहुंची। बाद में शादी के लिए दबाव डालने लगी और जब उसने शादी से इनकार किया तो उसे ई-मेल और धमकी भरे एसएमएस भेजने लगी। अगर उसने शादी नहीं की तो वह आत्महत्या कर लेगी। युवक ने अदालत से अपील की है कि वह युवती को ब्लैकमेल न करने का आदेश दे।
वर्तमान में गुड़गांव की एक इंटरनेशनल फर्म में काम करने वाले युवक की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजीव कैत ने मुंबई से आरोपी युवती को सोमवार को अदालत मे निजी तौर पर पेश होने का आदेश दिया है।
साथ ही कोर्ट ने युवक को निर्देश दिया है कि वह युवती को मुंबई से दिल्ली आने व रहने का खर्च वहन करें। याचिका में छात्र ने कहा है कि उसकी पिछले साल अगस्त में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिक शास्त्र में पीएचडी करने वाली युवती से इंटरनेट के जरिए जान-पहचान हुई थी।
इसके बाद दोनों चैटिंग करने लगे। छात्र का आरोप है कि दोस्ती बढ़ने के साथ ही युवती उससे मिलने पिछले नवंबर में दिल्ली आ पहुंची। बाद में शादी के लिए दबाव डालने लगी और जब उसने शादी से इनकार किया तो उसे ई-मेल और धमकी भरे एसएमएस भेजने लगी। अगर उसने शादी नहीं की तो वह आत्महत्या कर लेगी। युवक ने अदालत से अपील की है कि वह युवती को ब्लैकमेल न करने का आदेश दे।
इंदौर के महाराज ने शेख के रूप में लिया पुनर्जन्म ?
इंदौर. क्या होलकर राजवंश के वंशज और इंदौर के पूर्व शासक महाराज यशवंत राव होलकर द्वितीय ने पुनर्जन्म लिया है। कुछ लोगों को यह बात भले ही किस्सा लगे, लेकिन कतर के एक अरबपति शेख के लिए यह सच्चाई है।
कतर के सत्तारूढ़ अमीर का चचेरा भाई शेख सौद बिन अल-थानी खुद को इंदौर के पूर्व शासक यशवंतराव होलकर का पुनर्जन्म मानता है। दरअसल अल-थानी ने अमेरिकी कलाकार मैन रे द्वारा बनाए गए होलकर के एक चित्र को कुछ साल पहले देखा था। तभी से वह खुद को महाराज यशवंत का दूसरा जन्म मानने लगा। 1961 में महाराज यशवंत के निधन के पांच साल बाद पैदा हुए शेख अल-थानी और पूर्व शासक में काफी समानताएं हैं।
दोनों का चेहरा गोल है,माथा चौड़ा है,नाक पतली है और पेंसिल मूंछें हैं। शेख अल-थानी पर अपने ‘पिछले जन्म’ से जुड़ी वस्तुओं को इकट्ठा करने की धुन सवार है। इस पर वे लाखों रुपए भी खर्च कर रहे हैं। अल-थानी होलकर वंश से जुड़ी चीजों को इकट्ठा करने के लिए कुछ साल पहले इंदौर भी आए थे।
इंदौर के पूर्व प्रधानमंत्री सिरेमल बाफना के पड़पोते उपेंद्र बाफना ने बताया,‘कुछ साल पहले एंटीक वस्तुओं के कुछ डीलरों ने महाराज यशवंतराव से जुड़ी चीजों को इकट्ठा करने में मेरी मदद मांगी थी। बाद में पता चला कि ये लोग शेख अल-थानी के लिए ये चीजें इकट्ठा कर रहे हैं।
’लाखों डॉलर खर्च किए : इंदौर के इतिहासकार और आर्ट डीलर राजेंद्र सिंह ने बताया कि अल-थानी ने होल्कर वंश से जुड़ी पुरानी चीजों को खरीदने में लाखों डॉलर खर्च किए हैं। इनमें पुरानी तस्वीरें,दुर्लभ रत्न, कारें,कपड़े और फर्नीचर आदि शामिल हैं।
कुछ ऐसे हैं अल-थानी
शेख अल-थानी को अपनी अपार दौलत के साथ ही कला प्रदर्शनियों में चीजों को किसी भी कीमत पर खरीदने के लिए जाना जाता है। कभी-कभी तो वे प्रदर्शनी के पूरे कलेक्शन को अनुमानित कीमत से कहीं अधिक दाम पर खरीद लेते हैं। उन्होंने मार्च में पेरिस में आयोजित क्रिस्टीज की प्रदर्शनी में जर्मन डिजायनर एकार्ट मुथेसिअस द्वारा यशवंतराव होलकर के लिए बनाई गई सभी चीजें खरीद लीं।
शेख ने इंदौर के राजपरिवार के लिए बनाई गई एक बुक शेल्फ और दो लैंपों को खरीदने के लिए 15 लाख डॉलर तक खर्च कर दिए। वे पूर्व महाराज की तरह हूबहू पोज में तस्वीरें खिंचवाते हैं और इसके लिए एक सेशन पर हजारों डॉलर खर्च कर देते हैं।
दोहा में उनका अल वहाब एस्टेट यशवंतराव के आधिकारिक निवास माणिकबाग की तर्ज पर बना हुआ है।
कतर के सत्तारूढ़ अमीर का चचेरा भाई शेख सौद बिन अल-थानी खुद को इंदौर के पूर्व शासक यशवंतराव होलकर का पुनर्जन्म मानता है। दरअसल अल-थानी ने अमेरिकी कलाकार मैन रे द्वारा बनाए गए होलकर के एक चित्र को कुछ साल पहले देखा था। तभी से वह खुद को महाराज यशवंत का दूसरा जन्म मानने लगा। 1961 में महाराज यशवंत के निधन के पांच साल बाद पैदा हुए शेख अल-थानी और पूर्व शासक में काफी समानताएं हैं।
दोनों का चेहरा गोल है,माथा चौड़ा है,नाक पतली है और पेंसिल मूंछें हैं। शेख अल-थानी पर अपने ‘पिछले जन्म’ से जुड़ी वस्तुओं को इकट्ठा करने की धुन सवार है। इस पर वे लाखों रुपए भी खर्च कर रहे हैं। अल-थानी होलकर वंश से जुड़ी चीजों को इकट्ठा करने के लिए कुछ साल पहले इंदौर भी आए थे।
इंदौर के पूर्व प्रधानमंत्री सिरेमल बाफना के पड़पोते उपेंद्र बाफना ने बताया,‘कुछ साल पहले एंटीक वस्तुओं के कुछ डीलरों ने महाराज यशवंतराव से जुड़ी चीजों को इकट्ठा करने में मेरी मदद मांगी थी। बाद में पता चला कि ये लोग शेख अल-थानी के लिए ये चीजें इकट्ठा कर रहे हैं।
’लाखों डॉलर खर्च किए : इंदौर के इतिहासकार और आर्ट डीलर राजेंद्र सिंह ने बताया कि अल-थानी ने होल्कर वंश से जुड़ी पुरानी चीजों को खरीदने में लाखों डॉलर खर्च किए हैं। इनमें पुरानी तस्वीरें,दुर्लभ रत्न, कारें,कपड़े और फर्नीचर आदि शामिल हैं।
कुछ ऐसे हैं अल-थानी
शेख अल-थानी को अपनी अपार दौलत के साथ ही कला प्रदर्शनियों में चीजों को किसी भी कीमत पर खरीदने के लिए जाना जाता है। कभी-कभी तो वे प्रदर्शनी के पूरे कलेक्शन को अनुमानित कीमत से कहीं अधिक दाम पर खरीद लेते हैं। उन्होंने मार्च में पेरिस में आयोजित क्रिस्टीज की प्रदर्शनी में जर्मन डिजायनर एकार्ट मुथेसिअस द्वारा यशवंतराव होलकर के लिए बनाई गई सभी चीजें खरीद लीं।
शेख ने इंदौर के राजपरिवार के लिए बनाई गई एक बुक शेल्फ और दो लैंपों को खरीदने के लिए 15 लाख डॉलर तक खर्च कर दिए। वे पूर्व महाराज की तरह हूबहू पोज में तस्वीरें खिंचवाते हैं और इसके लिए एक सेशन पर हजारों डॉलर खर्च कर देते हैं।
दोहा में उनका अल वहाब एस्टेट यशवंतराव के आधिकारिक निवास माणिकबाग की तर्ज पर बना हुआ है।
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