Thursday, November 22, 2012

कसाब के अंतिम दो घंटों का हिसाब

मुंबई। मुंबई पर आतंकी हमला करने वाले अजमल कसाब की सुबह बुधवार को कुछ जल्‍दी हो गई थी। जगने के बाद उसने आधा घंटा नहाने और नमाज पढ़ने में बिताया। इसके बाद उसे नए कपड़े पहनने को दिए गए। करीब साढ़े पांच बजे पुणे जेल की उस बैरक में आईजी (जेल) मीरान बोरवांकर और जेल अधीक्षक योगेश देसाई पहुंचे, जहां कसाब रखा गया था। सबसे पहले कसाब को मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया। जेल के ही डॉक्‍टरों ने उसका चेकअप किया और फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया।
जब कसाब को फांसी दिए जाने का वक्‍त आया तो उसे एक खास सेल में ले जाया गया। वहां पहले से ही कुछ पुलिस अधिकारी मौजूद थे। उससे पूछा गया कि तुम्‍हारी कोई अंतिम इच्‍छा? अपने परिजनों के लिए कुछ लिख कर (विल/वसीयत) चाहोगे? लेकिन कसाब ने दोनों का जबाब 'ना' में दिया। इसके बाद उसे फांसी के लिए खड़ा किया गया। ठीक साढ़े सात बजे उसे फांसी दे दी गई। इसके दस मिनट बाद डॉक्‍टरों ने उसे मरा हुआ घोषित कर दिया।
सुबह 7.46 बजे पुलिस अधिकारियों ने महाराष्‍ट्र के गृह मंत्री आर आर पाटिल को इसकी जानकारी दी। इसके  आधे घंटे के बाद ही कसाब को जेल परिसर में दफना दिया गया।
वहां मौजूद सूत्रों के मुताबिक कसाब ने मौत से पहले कहा,  'अल्‍लाह कसम, ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।'

Tuesday, November 20, 2012

मां की ममता ने बना दिया खूबसूरत ज़रीन को शातिर 'बबली'

अहमदाबाद। हाल ही में अहमदाबाद पुलिस की गिरफ्त में आई ज़रीन अहमद मेमन की कहानी किसी फिल्मी कहानी से बिल्कुल भी कम नहीं। ज़रीन ने जब अपनी आपबीती सुनाई तो हर कोई दंग रह गया।


ज़रीन ने पुलिस को बताया कि छोटी उम्र में ही उसकी शादी हो गई थी। वैवाहिक जीवन के दरमियान उसने एक बेटे को जन्म दिया। परिवार के साथ उसका काफी सुखी जीवन बीत रहा था, लेकिन शादी के पांच वर्ष बाद पति से उसकी तकरार शुरू हो गई। अक्सर छोटी-छोटी बातों पर पति उससे झगडऩे और मारपीट करने लगता था।

आखिरकार दोनों ने तलाक लेने का निर्णय ले लिया, लेकिन कोर्ट ने बेटा पति को सौंपने का हुक्म सुनाया, क्योंकि कोर्ट की दलील थी कि ज़रीन के पास आय का ऐसा कोई साधन नहीं है, जिससे कि वह बेटे का पालन-पोषण कर सके।

इसके बाद ज़रीन ने फ्रीलांसर फोटोग्राफी की शुरुआत कर दी और अदालत से फिर गुहार लगाई कि बेटा उसे सौंप दिया जाए, लेकिन केस लडऩे और बेटा वापस दिलाने के लिए ज़रीन के वकील ने उससे डेढ़ लाख रुपए की मांग की। ज़रीन के पास इतनी रकम नहीं थी, लेकिन इसी बीच उसे एक मॉडलिंग फोटोग्राफी का ऑर्डर मिला। इसलिए उसे एक होटल में रोजाना जाना पड़़ता था, जहां उसकी मुलाकात अश्विन से हुई और इनके बीच अच्छी दोस्ती हो गई।

अश्विन ने ज़रीन को ज्यादा पैसे कमाने के लिए अहमदाबाद में फर्जी वीजा ऑफिस खोलने का ऑफर दिया। बेटे को वापस पाने के लालच में ज़रीन यह काम करने को तैयार हो गई और इस तरह वह सीधे हवालात जा पहुंची

जेम्स बॉन्ड की इन गैजेट्स पर मर मिटती है दुनिया!

हालही में आई बॉन्ड फिल्म स्काईफॉल को दुनियाभर में काफ़ी पसंद किया जा रहा है। यह फिल्म अब तक की सर्वश्रेष्ठ बॉन्ड फिल्म भी कही जा रही है। हालांकि बॉन्ड सीरीज़ के कई दीवाने इसे नहीं मानते। इसकी एक वजह यह भी रही कि इस फिल्म में बॉन्ड को एक नए अवतार में दिखाया गया जो पिछले जेम्स बॉन्ड की तरह खतरनाक और स्टायलिश गैजेट्स का उपयोग नहीं करता बल्कि एक छोटी सी ख़ास ऑटोमेटिक गन और एक मैग्नेटिक चिप के ज़रिए दुनिया बचाने का मिशन अपने हाथ में लेता है। बात चल ही रही है इसलिए आज बात करते हैं उन कुछ बेहतरीन गैजेट्स की जो पिछले कुछ समय में बॉन्ड की शान रहे लेकिन परेशान मत होइए यहां हम उनकी बात बिल्कुल नहीं करेंगे जिनकी तकनीक आज के साइंटिफिक कैलकुलेटर से भी पुरानी हो गई है यहां बात उनकी है जो पुरानी तो हैं लेकिन बेमिसाल हैं...

मौत टूटी जब आधी रात, कितना डर गया भोपाल!

भोपाल। अरेरा कॉलोनी ई-6 के पास साईं बाबा नगर बस्ती में रविवार रात करीब 12.15 बजे नगर निगम की टंकी गिरने से हुए भीषण हादसे से अब भी वहां के रहवासी डरे हुए हैं।




इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 32 लोग बुरी तरह घायल हैं। इस हादसे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने गहरा दु:ख जताते हुए प्रभारी मंत्री जयंत मलैया को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर निकुंज श्रीवास्तव ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने न्यायिक जांच की मांग की है।





हादसे की भीषणता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आधी रात टूटी इस आफत से कल दिनभर प्रशासन जूझता रहा। पानी की टंकी गिरने से यहां बिजली के तार टूट गए थे, जिससे करंट फैल गया था। सोमवार सुबह जब सेना के जवान पहुंचे, तब उन्होंने जेसीबी मशीन के लिए रास्ता बनाया और मलबा हटाने का कार्य शुरू हो सका।

फेसबुक ने प्रिंस को किया प्रताड़ित, लखनऊ में एफआईआर दर्ज

लखनऊ. फेसबुक से जुड़े लोगों की परेशानि‍यां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मुंबई में फेसबुक पर लाइक और कमेंट के चलते एक युवती को दि‍क्‍कत उठानी पड़ी तो लखनऊ में एक समाजसेवी को अचानक बंद कि‍ए गए अपने अकाउंट की वजह से भारी मानसि‍क परेशानी का सामना करना पड़ा। पेशे से वकील व समाजसेवी प्रिंस लेनि‍न ने मामले का मुकदमा हुसैनगंज थाने में दर्ज कराया गया है।

जिसने बदली कोटा की सूरत, वह आज खुद हो रहा है बदसूरत

कोटा.  1960 में उद्घाटन के बाद बैराज ने तो कोटा की सूरत बदल दी, लेकिन सरकार इसका रख-रखाव तक नहीं कर रही है।  
दोहन के साथ इसका जमकर दुरुपयोग भी हो रहा है। बांध की अथाह जलराशि में आज भी बहुत कुछ देने की संभावना है, लेकिन वन विभाग का अड़ंगा गिनाकर विकास के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
4 साल में 150 से ज्यादा चिट्ठियां लिखी, गेट की रस्सियों और पेंट तक का पैसा नहीं दे रहे
2008 से कोटा बैराज की मरम्मत पर सरकार की तरफ से एक पैसा भी नहीं खर्च हुआ है। पानी का गेज बताने वाला मीटर, सुरक्षा के लिए लगे सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं। सुरक्षा की दृष्टि से हर साल पांच गेटों की पुताई और एक की रस्सी बदलने का नियम है, लेकिन इसका तक पालन नहीं हो रहा है।
इसके लिए स्थानीय अधिकारी सिंचाई विभाग के मुख्यालय को 4 साल में 150 से ज्यादा  बार चिट्ठियां लिख चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। देख-रेख के अभाव में बैराज पर सीमेंट की रेलिंग गिर रही हैं। स्ट्रक्चर पर कुछ जगह पत्थर भी बाहर की तरफ खिसक आए हैं। गेटों की सील भी खराब हो गई है, जिससे रोज सैकड़ों लीटर पानी बेकार बह रहा है। डाउन स्ट्रीम की तरफ एक दीवार लगभग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। बारिश के दिनों में गेट खोलते हैं तो ये तेज आवाज करते हैं।
अवैध शिकार- बैराज के आसपास अवैध मछलियों का शिकार हो रहा है। रात के समय शिकारी डाउन व अप स्ट्रीम क्षेत्र में जाल लगाते हैं। दिन में इनको उठाया जाता है। इसकी जानकारी स्थानीय कर्मचारी अधिकारियों को देते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।
जर्जर नहरी तंत्र को चाहिए 2 हजार करोड़
चंबल का 50 साल पुराना नहरी तंत्र कच्चा है तथा इतना जर्जर हो चुका है कि इसके कायाकल्प के लिए करीब 2 हजार करोड़ रुपए चाहिए। जबकि अब तक 100 करोड़ रुपए के ही काम हुए हैं। दाईं मुख्य नहर में जरूर दोनों राज्यों की हिस्सेदारी से 166 करोड़ रुपए के काम हुए हैं। राजस्थान सरकार ने नहरी तंत्र की मजबूती के लिए 1274 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसके तहत पहले चरण में 150 करोड़ रुपए के काम कराए जाने हैं।
सरकार कुछ करे तो बने बात 
विभाग ने बैराज की सुरक्षा को लेकर प्लान बनाकर मुख्यालय भेजा हुआ है। यहां पुलिस चौकी बनाने व सीसी टीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव भी बनाया हुआ है। इसके साथ ही बोट के बालाजी से सकतपुरा तक अलग से मार्ग बनाने का सुझाव भी दिया हुआ है। इस पर सरकार सहमति दे तो सारी व्यवस्थाएं हो सकती है। विभाग को पास तो मेंटीनेंस का बजट तक नहीं है। काफी पत्र इस बारे में लिखे जा चुके हैं।
-हेमराज श्रीमाल, चीफ इंजीनियर जलसंसाधन विभाग

Monday, November 12, 2012

अकेलेपन से परेशान शाहरुख, 'जब तक है जान' का ग्रैंड प्रीमियर आज

कोलकाता. अपनी नई फिल्‍म 'जब तक है जान' की सफलता के लिए दिन-रात प्रचार में व्‍यस्‍त शाहरुख खान (शाहरुख की 20 BEST फिल्‍में) ने निजी जिंदगी का दर्द बयां किया है। बॉलीवुड के किंग कहे जाने वाले शाहरुख परिवार, दोस्‍त  और लाखों प्रशंसक होने के बावजूद खुद को अकेला महसूस करते हैं। वह अपने जीवन का एक दिन अपने लिए चाहते हैं। उन्‍होंने कहा, "मैं खुद के लिए एक दिन चाहता हूं, लेकिन किससे लूं? जब मैं खाली भी रहता हूं, मैं उम्मीद नहीं करता कि हर कोई मेरे साथ हो, क्योंकि उनकी अपनी जिंदगी चलती रहती है। इसलिए उस वक्त आप अकेले हो जाते हैं।
हाल ही में 47वां जन्‍मदिन मनाने वाले  शाहरुख एक्टिंग के साथ-साथ कई ब्रांड के प्रचार में व्यस्त रहते हैं, उन्‍हें अपनी फिल्म निर्माण कम्पनी 'रेड चिलीज एंटरटेनमेंट' और 'इंडियन प्रीमियर लीग' की टीम 'कोलकाता नाइट राइडर्स' का काम भी देखना होता है। ऐसे में उन्हें लगता है कि उनकी जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियां अक्सर छूट जाती हैं। उन्होंने कहा, "आपकी कोई निजी जिंदगी नहीं रह जाती। मेरा परिवार मुझे अपने साथ फिल्म देखने नहीं ले जाता। उन्हें लगता है कि मैं परेशान हो जाऊंगा।"
फिल्‍म समीक्षक जय प्रकाश चौकसे का भी कहना है, 'शाहरुख खान अपनी विराट व्यावसायिक सफलता के भार के कारण जीवन में भी हंस नहीं पाते, क्योंकि जब वे सोने का प्रयास कर रहे होते हैं, तब भी उनकी कंपनियां और पूंजी निवेश मुद्रा छापता रहता है। धन की विपुलता आदमी को कई मामलों में बड़ा गरीब कर देती है। एक तो आपसे हर मिलने वाला मुलाकात को कैश करना चाहता है, अत: हाथ मिलाते हुए भी भय लगता है कि अंगूठी न निकाल ले। सफलता आपसे बहुत कुछ छीन लेती है। मुफलिस मौज में ठहाके लगाता है और गरीबी को भी अपने लिए मनोरंजन बना लेता है। कड़की के दिनों में एक ही दाल को चार कटोरियों में डालकर पांच कोर्स डिनर का आनंद भी लिया जा सकता है।'