Monday, September 5, 2011

बी.बी.सी. कहता है........... ताजमहल........... एक छुपा हुआ सत्य.......... कभी मत कहो कि......... यह एक मकबरा है..........

बी.बी.सी. कहता है...........
ताजमहल...........
एक छुपा हुआ सत्य..........
कभी मत कहो कि.........
यह एक मकबरा है..........




ताजमहल का आकाशीय दृश्य......




                                                                                                             
आतंरिक पानी का कुंवा............














ताजमहल और गुम्बद के सामने का दृश्य















गुम्बद और शिखर के पास का दृश्य.....





















शिखर के ठीक पास का दृश्य.........



















आँगन में शिखर के छायाचित्र कि बनावट.....



















प्रवेश द्वार पर बने लाल कमल........















ताज के पिछले हिस्से का दृश्य और बाइस कमरों का समूह........















पीछे की खिड़कियाँ और बंद दरवाजों का दृश्य........

















विशेषतः वैदिक शैली मे निर्मित गलियारा.....














मकबरे के पास संगीतालय........एक विरोधाभास.........















ऊपरी तल पर स्थित एक बंद कमरा.........














निचले तल पर स्थित संगमरमरी कमरों का समूह.........















दीवारों पर बने हुए फूल......जिनमे छुपा हुआ है ओम् ( ॐ ) ....
















निचले तल पर जाने के लिए सीढियां........


















कमरों के मध्य 300 फीट लंबा गलियारा..


















निचले तल के२२गुप्त कमरों मे सेएककमरा...



















२२ गुप्त कमरों में से एक कमरे का आतंरिक दृश्य.......














अन्य बंद कमरों में से एक आतंरिक दृश्य..



















एक बंद कमरे की वैदिक शैली में निर्मित छत......















ईंटों से बंद किया गया विशाल रोशनदान .....














दरवाजों में लगी गुप्त दीवार , जिससे अन्य कमरों का सम्पर्क था.....



















बहुत से साक्ष्यों को छुपाने के लिए , गुप्त ईंटों से बंद किया गया दरवाजा......



















बुरहानपुर मध्य प्रदेश मे स्थित महल जहाँ मुमताज-उल-ज़मानी कि मृत्यु हुई थी.......














बादशाह नामा के अनुसार ,, इस स्थान पर मुमताज को दफनाया गया.........
















अब कृपया इसे पढ़ें .........

प्रो.पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि........

" ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था "

प्रो.ओक. अपनी पुस्तक "TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा इस
बात में विश्वास रखते हैं कि ,--

सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था.....


ओक कहते हैं कि......

ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर , एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था.


अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था ,,

=> शाहजहाँ के दरबारी लेखक " मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी " ने अपने " बादशाहनामा " में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है ,, जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि , शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद , बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके ०६ माह बाद , तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार , को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए , आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया , लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे , पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे.

इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा
जयसिंह को दिए गए थे.......

=> यह सभी जानते हैं कि मुस्लिम शासकों के समय प्रायः मृत दरबारियों और राजघरानों के लोगों को दफनाने के लिए , छीनकर कब्जे में लिए गए मंदिरों और भवनों का प्रयोग किया जाता था ,
उदाहरनार्थ हुमायूँ , अकबर , एतमाउददौला और सफदर जंग ऐसे ही भवनों मे दफनाये गए हैं ....

=> प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है---------

=" महल " शब्द , अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में
भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता...
यहाँ यह व्याख्या करना कि महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है......वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है---------

पहला ----- शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था ,,, बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ...

और दूसरा----- किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए ,,, यह समझ से परे है...

प्रो.ओक दावा करते हैं कि , ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है , साथ ही साथ ओक कहते हैं कि----
मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी , चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है क्योंकि शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि नही करता है.....



इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं......
तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था-----

==> न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है...


==> मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष ( 1631) में हुई थी उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था......


==> यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 ( मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया ,, परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया , जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था......


==> फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था और लगभग दस साल यहाँ रहा , के लिखित विवरण से पता चलता है कि , औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था.......


प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि , ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है.......

आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं , जो आम जनता की पहुँच से परे हैं

प्रो. ओक. , जोर देकर कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति , त्रिशूल , कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं.......

==> ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है ,, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता , जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है , फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब.... ????



राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं....


प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए , और विशेषज्ञों को छानबीन करने दे ....


ज़रा सोचिये....!!!!!!


कि यदि ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत , शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन , " तेजो महालय " को बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों...... ?????
तथा......

इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों........ ???? ???


आंसू टपक रहे हैं , हवेली के बाम से ,,,,,,,,
रूहें लिपट के रोटी हैं हर खासों आम से.....
अपनों ने बुना था हमें , कुदरत के काम से ,,,,

फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं हम गैरों के नाम से......
















" कृपया इस संदेश को सभी को भेजें

Saturday, September 3, 2011

अपनी इस लाडली को चाहकर भी प्यार नहीं कर सकती 'मां'



लंदन। गली में पड़ोसी का बच्चा हो या ट्रेन में बैठे किसी अजनबी का। हम उसे छूने और दुलारने से खुद को नहीं रोक पाते। लेकिन हॉली की मां चाह कर भी अपनी बच्ची को छू नहीं सकती।

कारण सात वर्षीय इस बच्ची को त्वचा का एक दुर्लभ रोग है। उसकी त्वचा इतनी नाजुक है, जैसे तितली के पंख, हाथ लगाया नहीं कि छिल जाती है और छाले पड़ जाते हैं। कभी-कभी खून भी रिसने लगता है।

इस दुर्लभ बीमारी का नाम एपीड्रमोलसिस बुलोसा है, जिसके कारण त्वचा को मांसपेशियों से जोड़े रखने वाला जरूरी ग्लू खत्म हो जाता है। दूसरे बच्चों की तरह हॉली को भी रोलर स्केटिंग और कंप्यूटर पर गेम खेलना बहुत पसंद हैं, लेकिन बिना खून बहाए वो ऐसा नहीं कर पाती।

हाल ही में हॉली ने घुड़सवारी भी सीखी, बावजूद इसके कि यह उसकी जान के लिए खतरा हो सकता था। हॉली की मां ले टेलर के मुताबिक मेरी बच्ची जितनी बड़ी बीमारी से पीड़ित है, ईश्वर ने उसे उतना बड़ा दिल दिया है और हौसला भी। उन्हें यकीन है कि कोई इलाज जरूर मिलेगा।

इन महाशय ने सांप को ऐसे काटा कि हो गया दो इंच घाव



एक बदकिस्मत सांप की उस वक़्त आपातकालीन सर्जरी करनी पड़ी, जब कैलिफोर्निया के एक आदमी ने उसे दो बार काट डाला। जीव चिकित्सकों को उसके शरीर पर हुए दो इंच के घाव पर टांके लगाने पड़े। काटी गई जगह से मांस का कुछ हिस्सा भी ग़ायब था।

कैलिफोर्निया के डेविड सेंक को एक सांप को बुरी तरह काटने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है। फॉक्स 40 द्वारा जेल में पूछने पर डेविड ने बताया कि उसे याद नहीं कि उसने सांप को कब काटा. डेविड ने बताया कि वो उस वक़्त नशे में था।

डेविड ने कहा "अगर सांप के मालिक का पता चले तो मुझे बताइएगा, मैं उससे माफ़ी मांगना चाहता हूं। मुझे ख़ुशी है कि सांप ज़िंदा है और जल्द ही ठीक हो जाएगा। मैं उसके इलाज में आए खर्चे की भरपाई की कोशिश करूंगा।"


टीम अन्‍ना पर वार: प्रशांत भूषण को 15 दिन की जेल और पूरी टीम पर केस का खतरा


नई दिल्‍ली. भारी जन समर्थन के बूते जन लोकपाल बिल पर सरकार को झुका देने वाली टीम अन्‍ना को एक और झटका लगा है। टीम अन्‍ना के सदस्‍य और वरिष्‍ठ वकील प्रशांत भूषण को संसद के विशेषाधिकार हनन का नोटिस मिला है। भूषण पर सार्वजनिक रूप से यह कहने का आरोप है कि सांसद पैसे लेकर कानून पास करते हैं। भूषण को 14 सितंबर तक इस नोटिस का जवाब देना है। भूषण ने कहा, ‘मुझे विशेषाधिकार हनन का नोटिस मिला है और मैं इसका जवाब दूंगा।’


प्रशांत भूषण के पिता और पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने कहा कि यह मामला विशेषाधिकार हनन के तहत नहीं आता है। उन्‍होंने कहा, ‘नोटिस का जवाब दिया जाएगा लेकिन यदि सरकार फिर भी कोई कदम उठाती है तो हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।’ भाजपा ने टीम अन्‍ना का समर्थन किया है। पार्टी प्रवक्‍ता रविशंकर प्रसाद ने आज कहा कि कांग्रेस भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आंदोलन को कमजोर करने के लिए टीम अन्‍ना को डराना चाहती है।

इस तरह का एक नोटिस किरण बेदी को भी मिला है। उन्‍होंने सांसदों के बारे में टिप्‍पणी की थी कि वे मुखौटा ओढ़े रहते हैं और कभी इस तरफ, कभी उस तरफ की बातें करते हैं। अगर ये दोनों विशेषाधिकार हनन का दोषी पाए गए तो इन्‍हें 15 दिनों की जेल भी हो सकती है। बेदी भी नोटिस का जवाब तैयार कर रही हैं।


टीम अन्‍ना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी हो रही है। दिल्‍ली पुलिस इसकी तैयारी कर रही है। एफआईआर रामलीला मैदान में अन्‍ना के 12 दिन के अनशन के दौरान कई शर्तें तोड़ने के आरोप में की जा सकती है।

दिल्‍ली पुलिस के सूत्र बताते हैं कि बीते रविवार अन्‍ना का अनशन टूटने के बाद तमाम पुलिस अफसरों की कई बैठकें हुई हैं। इन बैठकों में यही तय किया गया कि किस आधार पर टीम अन्‍ना के खिलाफ मुकदमा किया जा सकता है। तय हुआ है कि टीम अन्‍ना ने रामलीला मैदान में आंदोलन के लिए जो लिखित हलफनामा दिया था, उसकी चार अहम शर्तों का उल्‍लंघन हुआ है और इसके लिए टीम अन्‍ना को कठघरे में खड़ा किया जा सकता है।
जिन शर्तों के उल्‍लंघन की बात कही जा रही है, उनमें एक तो रात 10 बजे के बाद माइक या लाउडस्‍पीकर का इस्‍तेमाल करना है। समर्थकों को इंडिया गेट पर जमा होने के लिए कहने को भी शर्तों का उल्‍लंघन माना जा रहा है, क्‍योंकि इंडिया गेट पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं ली गई थी। इंडिया गेट पर मशाल जुलूस निकाल कर ट्रैफिक बाधित करने का आरोप भी टीम अन्‍ना पर लगाया जा सकता है। टीम अन्‍ना के आह्वान पर समर्थकों ने पूरे लुटियंस जोन, यहां तक कि प्रधानमंत्री निवास के पास भी धरना दिया था। सूत्र बताते हैं कि दिल्‍ली पुलिस इस मामले में भी कानूनी जानकारों की राय ले रही है।

सूत्र बताते हैं कि अगर कानूनी राय पक्ष में रही, तो कमला नगर पुलिस थाने में टीम अन्‍ना के खिलाफ एफआईआर की जा सकती है। बताया जाता है कि इस पुलिस थाने की ओर से एसीपी ने अनशन के दौरान आयोजकों को आठ चेतावनी भरी चिट्ठी भी भेजी थी। इनमें से किसी भी पत्र का आयोजकों की ओर से जवाब नहीं दिया गया है। इन पत्रों को भी अब दिल्‍ली पुलिस अपना केस मजबूत करने के लिए इस्‍तेमाल कर सकती है।
सूत्र बताते हैं कि रामलीला मैदान में जिन शर्तों का उल्‍लंघन हुआ है, उसकी रिपोर्ट तैयार कर जल्‍द से जल्‍द पुलिस मुख्‍यालय को भेजी जानी है। वहां बड़े अफसर और कानूनी विशेषज्ञों की राय के बाद एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। सुबूत के तौर पर रामलीला मैदान की घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग पेश की जाएगी। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर समाचार चैनलों से भी वीडियो फूटेज उपलब्‍ध कराने के लिए कहा जा सकता है।


क्या है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव
संसद में विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव को अन्य प्रस्तावों और संसद के सामान्य कामकाज पर तरजीह दी जाती है। इस तरह के प्रस्ताव में आम तौर पर बहस की गुंजाइश नहीं होती है। इस प्रस्ताव के तहत सदन का सदस्य नोटिस देकर अध्यक्ष की अनुमति से विशेषाधिकार हनन का मामला उठा सकता है। अगर स्पीकर को लगता है कि सदस्य द्वारा उठाया गया मुद्दा गंभीर है तो वह इसे स्वीकार कर लेता है। नोटिस को मंजूर किए जाने के बाद स्पीकर इस पर सदन में बहस करा सकता है या फिर इसे विशेषाधिकार समिति को भेज सकता है। विशेषाधिकार समिति जरूरत समझने पर मामले से संबंधित व्यक्ति को तलब कर सकती है और दोष साबित होने पर सज़ा भी सुना सकती है। अगर संसद में विशेषाधिकार हनन प्रस्‍ताव पारित हुआ तो अवमानना के दोषी व्‍यक्ति को 15 दिन जेल की सजा भी हो सकती है।

फोटो कैप्‍शन: रालेगण सिद्धि पहुंचने पर गांववालों ने अन्‍ना हजारे का इस तरह स्‍वागत किया।

आपकी राय
पहले टीम अन्‍ना के सदस्‍यों को आयकर विभाग का नोटिस और अब दिल्‍ली पुलिस की यह तैयारी। क्‍या कहेंगे आप? अगर पुलिस टीम अन्‍ना पर एफआईआर करती है तो क्‍या यह अन्‍ना की मुहिम को और मजबूती देगा या फिर सरकार को अपना पक्ष मजबूत करने में मदद करेगा? क्‍या इस तरह की कार्रवाई से एक बार फिर जन समर्थन सरकार के खिलाफ जा सकता है और फिर उसे कदम पीछे खींचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है?